या कुछ और?


या कुछ और?

2009 में शुरू होने वाली पतंजलि जो कभी एक दवाखाना हुआ करती थी आज भारत की बड़ी FMCG कंपनियो में से एक है।

हाल के कुछ वर्षों में भारत में स्व-निर्मित युवा अरबपतियों की संख्या में वृद्धि देखने को मिली है।

एक समय था जब किसी मॉडल को इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए खुद को हर पैमाने पर खरा साबित करना पड़ता था। सौभाग्य से, वे दिन काफ़ी हद तक समाप्त हो गए हैं ।

पश्चिम बंगाल चुनाव में राज्य की जनता ने एक बार फिर से ममता बनर्जी को विजयी बनाया है और राज्य की कमान उन्हें सौंप दी है। ममता के सामने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के अन्य दिग्गज नेताओं की नहीं चली और अंततः ममता बनर्जी की जीत हुई।

किसी भी देश की विदेश नीति का मुख्य आधार देशहित होता है और ऐसा ही भारत के साथ भी है। भारत अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को बेहतर बनाने, विभिन्न देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए हमेशा प्रयास करता रहा है।

पहली लहर की पीक एक दिन में अधिकतम 98 हजार मरीज़ों के साथ बनी थी, जिसके बाद संक्रमितों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आने लगी और पहली लहर समाप्त हुई। लेकिन, मार्च 2021 में COVID की दूसरी लहर की शुरुआत हुई जोकि पहली लहर से कई गुना घातक साबित

आधुनिक सुंदरियाँ अपनी खूबसूरती और चेहरों के हावभाव से हमारे दिल की धड़कनों को बढ़ा देती हैं। लेकिन इस खूबसूरती को बनाए रखना इतना आसान नहीं होता है।

ब्लॉगिंग युग की शुरुआत के बाद से, कई भारतीय महिलाओं ने ब्लॉगिंग शुरू की है। उनमें से कुछ अपने बेहतरीन कंटेंट के कारण प्रमुख ब्लॉगर के रूप में उभरी।

कोविड-19 वैक्सीन विकास के दौरान सीरम इंस्टिट्यूट को बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा I आइये ऐसी ७

गुड़िया! हाँ, बिल्कुल सही सुना आपने। आप विश्वास नहीं करेंगे, लेकिन कुछ लोग अपने खाली समय में कुछ फैंसी कपड़ों के साथ बहुत कुछ कर सकते हैं। इस आर्टिकल में ऐसी ही एक हस्ती के बारे में हम जानेंगे जिनका नाम है ग्रेस पनिसरा।

लगभग 1 साल से सम्पूर्ण विश्व COVID-19 महामारी से जूझ रहा है । पूरी दुनिया में लगभग 6 करोड़ लोग COVID से संक्रमित हो चुके हैं और इससे राजनेता भी अछूते नहीं हैं ।

वर्तमान समय में विश्वस्तर पर विवाह का सामान्य चलन परिवर्तित हो गया है। जो देश आर्थिक रूप से जितना अधिक स्थिर और उन्नत है वहाँ के लोगों को लगता है कि वे देर से विवाह कर लेंगे।

पश्चिमी लोगों को कुछ अरूचिकर व्यंजन खाने में आनंद मिलता है और हम उनकी पाककला का दंडवत हो न्याय करने के लिए यहाँ हैं।

सम्पूर्ण देश में इस समय कोरोना के लगभग 35 हज़ार मामले संदिग्ध पाए गए हैं । लॉक डाउन को 17 मई तक बढ़ा दिया गया है । आखिर प्रश्न यह उठता है कि . वे कौन से कारण थे जिनके कारण भारत में इस वायरस का विस्तार इतनी तेजी से हुआ

बिटकाॅयन की शुरूआत 3 जनवरी 2009 को हुई। यह एक ऐसी मुद्रा है जिसकी सिर्फ गणना होती है। इसका आभास किया जा सकता है पर यह दृष्टिगोचर नहीं होती क्योंकि इसका कोई भौतिक रूप नहीं है। वास्तव में यह डिजिटल युग की डिजिटल करेंसी है जो सिर्फ कम्प्यूटर नेटवर्किंग के द्वारा विनिमय करती है। इसके प्रयोग में कोई शुल्क नहीं लगता। इसकी क्रेडिट लिमिट नहीं है। इसका मूल्य इसकी आपूर्ति और माँग के अनुसार बढ़ता रहता है।

दुख की बात है कि कुछ लोगों के लिए लाॅकडाउन के हित को समझने के लिए यह पर्याप्त नहीं है कि सरकार के लिए इसको लागू करना कितनी गंभीर स्थिति है। हालांकि एक अत्यंत उत्साही पुलिस अफसर को यह लग रहा था कि वह लोगों को डरा धमका कर इस वायरस के प्रसार को रोक लेगा।

यहाँ यह बताना समीचीन होगा कि कोरोना वायरस की समस्या तेज़ी से विश्व में फैल रही है, ढेर सारे भ्रामक प्रचार और प्रकोप के बारे में षड्यंत्र सामने आए हैं। आखिर यह विषाणु है क्या – एक गुप्त जैविक अस्त्र, चीन की अर्थव्यवस्था की प्रगति को रोकने के लिए पेंटागन की गलत सोच या शायद यह केवल एक स्वतंत्र विषाणु है।

भारत प्रारम्भ से ही विश्व गुरु रहा है। तक्षशिला, नालन्दा, पाटलीपुत्र जैसे विश्वविद्यालय भारत की उन्नत वैचारिकता का यशोगान करते हैं। आधुनिक भारत भी अपनी शिक्षा व्यवस्था के कारण वैश्विक पटल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता रहा है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक अर्वाचीन व्यवस्था अपनी गौरव शाली परम्परा को यथावत रखने में कामयाब है।

मोदी जी वैश्विक परिदृश्य में अपनी विनम्रता, कुशल नेतृत्व क्षमता, मजबूत विदेश नीति, वक्तृता शैली, फिटनेश के प्रति सतर्कता के कारण अत्यधिक मजबूती से स्थापित होते जा रहे हैं ।