घर में रहने वाले लोगों को डराने का भारतीय पुलिसकर्मी का मूल तरीका

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दुख की बात है कि कुछ लोगों के लिए लाॅकडाउन के हित को समझने के लिए यह पर्याप्त नहीं है कि सरकार के लिए इसको लागू करना कितनी गंभीर स्थिति है। हालांकि एक अत्यंत उत्साही पुलिस अफसर को यह लग रहा था कि वह लोगों को डरा धमका कर इस वायरस के प्रसार को रोक लेगा।

दुनिया भर में कोविड-19 के वायरस के प्रसार के साथ, अधिकतर देश उपाय के रूप में नरमी या कठोरता से लाॅकडाउन लागू कर रहे हैं। कफ्र्यू का उपयोग करने के लिए चाहे घर से काम करें और उचित अनुमति प्रपत्र के बिना घर के बाहर न जाएँ, विश्व के समस्त देश कोरोना के प्रसार रोकने के लिए अपने यहाँ के नागरिकों को यही दिशा निर्देश देने का पूर्ण प्रयास कर रहे हैं।

भारत उन देशों में से एक है जो कोरोना वायरस के हमले का कड़ा सामना कर रहा है। वर्तमान में 1600 मामलों की पुष्टि और 45 मौतों की सूचना है। भारत बाद में वायरस के संपर्क में आने वाले देशों में से एक है, लेकिन यहाँ की सरकारने वायरस को फैलने से रोकने के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा नहीं की। वह आज अपने 1300 करोड़ नागरिकों के लिए तीन सप्ताह के लाॅकडाउन में है। मुझे नहीं लगता कि इस कदम से भारत अगला इटली या स्पेन बनेगा।

क्योंकि सभी लोगों को घर के अंदर रहने के लिए कहा गया है, इसलिए हम सोच सकते हैं कि लोग भी इस दिशा-निर्देश का अनुसरण करने के लिए गंभीर है। दुख की बात है कि कुछ लोगों के लिए लाॅकडाउन के हित को समझने के लिए यह पर्याप्त नहीं है कि सरकार के लिए इसको लागू करना कितनी गंभीर स्थिति है। हालांकि एक पुलिस अधिकारी को यह लग रहा था कि इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए वह लोगों को डराता रहेगा। उसने वास्तविक कोरोना वायरस की तरह का एक मुखौटा बनवाया और उसके द्वारा वह बिना कार्य के बाहर गए लोगों को रोक रहा है। इस मुखौटे के प्रयोग के द्वारा वह लोगों को समझा रहा है कि संकट अत्यंत प्रचंड है और अत्यावश्यक है जितना अधिक संभव हो सके घर पर रहें।

भारत सरकार पहले ही पूरे देश में इस सूचना का प्रचार करने के लिए मुस्तैद थी, यहाँ तक कि कुछ सार्वजनिक घोषणाओं को रिकार्ड करके पहले ही से प्रसारित कर दिया था कि कोई भी नागरिक व्यक्तिगत रूप से फोन से संपर्क कर सकता है। भारत में गरीबी और कुछ सीमा तक उचित देखभाल और उपकरणों की कमी इस वायरस को यहाँ रोकने में सहायक है। लोगों से जितना हो सके उतना आने वाले कुछ सप्ताहों तक अंदर रहने के लिए कहा जा रहा है। वायु मार्ग द्वारा देश में प्रवेश करने वाले लोगों को एक प्रपत्र भरना है जिसमें यदि उनके अंदर कोरोना के संभावित लक्षण हैं तो वह स्वयं सूचित करेंगे।

अगर हर देश ने भारत की तरह शीघ्रता और संजीदगी से कार्य किया होता तो हम शायद पहले ही कोरोना वायरस को रोक लेते। कोई इटली, स्पेन, वुहान या न्यूयार्क जैसा नहीं होता। हम मानव हैं जो आदतन नियमों को तोड़ने के लिए बाध्य हैं। लेकिन इस बात को भी नजर अंदाज करना कठिन है कि संबंधित सरकार द्वारा लागू इस दिशा निर्देश का कठोरता से पालन करके ही हम इस संकट से मुक्ति पा सकते हैं।

स्मरण रखें कि यह केवल अभी आपके स्वास्थ्य के लिए नहीं ह,ैे लेकिन इसका तात्पर्य यह भी नहीं कि आप सुरक्षित हैं या आपके आस-पास के लोग संकट में नहीं हैं, हो सकता हैे वर्तमान में कोरोना वायरस के गंभीर संक्रमण का संकट हो। हो सकता है आप गलत हों, आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत न हो और आप ऐसे लोगों को संक्रमित कर सकते हों जो आपकी तरह भाग्यशाली नहीं हैं। हमें केवल कुछ सप्ताह इन नियमों का पालन करना है। कुछ महीनों बाद हम सभी इस बारे में हँसेंगे। और स्मरण रखें अगर आप बिना अनुमति के बाहर जाते हैं तो कोरोना आपको ढूँढ कर रोक देगा। यह वायरस न तो आराम करता है और न ही न्याय करता है।



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