भारत की धार्मिक राजधानी वाराणसी के बारे में 8 तथ्य

Advertisements

वाराणसी विश्व के प्राचीनतम सतत आवासीय शहरों में से एक है। वाराणसी विभिन्न मत मतान्तरों की संगम स्थली रही है यह सहस्त्रों वर्षो से उतर भारत का सांस्कृतिक व धार्मिक केंद्र रहा है। इसके 8 तथ्य निम्न वत हैं।

कहा जाता है कि बनारस की स्थापना स्थापना आदिदेव शिवशंकर ने की थी। गौतम बुद्ध ने यहाँ बुद्ध धर्म की स्थापना की तथा इसी शहर में अपनी पहली देशना दी थी। भक्ति काल के कई मुख्य लोंगो का जन्म वाराणसी में ही हुआ था।

औरंगज़ेब के राज़ में  वाराणसी कई मंदिरों को तुड़वा दिया गया उनमें काशी विश्वनाथ मंदिर भी शामिल है। अंग्रेज़ो के राज में वाराणसी को एक नया राज्य बना दिया गया थाए जिसकी राजधानी रामनगर थी। 

यह शहर बनारसी साड़ियों के लिए भी जगत प्रसिद्ध है। सोने की जरी लगी साड़ियां अपने मे बेमिसाल होती हैं। रेशमी कपड़ो को सीना यहां का मुख्य काम है। ज्यादातर मुसलमान इन कामों में व्यस्त रहते हैं। 

यहाँ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलोंए ऐतिहासिक स्थलों को देखने वर्ष भर पर्यटकों का तांता लगा रहता है। विशेषकर ऐतिहासिक स्थलों में रामनगर का किला प्रमुख स्थान है। यह गंगा के पूर्वी तट पर स्थित है। इसे अठारहवी शताब्दी में काशी नरेश  राजा बलवंत सिंह ने बनवाया था। यहीं पर जैन घाट भी है जो कि भगवान पार्श्वनाथ का जन्म स्थल है। इस घाट पर तीन जैन मंदिर बनाये गए हैं।

गंगा के किनारे अवस्थित दशाश्वमेध घाट सबसे पुराना घाट है। कहा जाता है कि ब्रह्मा ने शिव के लिए इस घाट का निर्माण किया था। वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि गंगा स्नान करने के बाद इस मंदिर के दर्शन कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। संकट मोचन मंदिर व दुर्गा मन्दिर हिंदुओ के पवित्र मन्दिरो में से एक हैं। मस्जिदों में ज्ञानवापीए आलम गीर व बीबी रज़िया मस्जिदे प्रमुख है। 

बनारस खान पान के लिए भी एक विशिष्ट पहचान रखता है। बनारसी पान ए लँगड़ा आम ए मलइयो ए कचौड़ी जलेबी हो या अन्य खाद्य पदार्थ सभी अपनी लज़्ज़त से बनारसी विशेषता में चार चांद लगाते हैं। सुबह के नाश्ते में चने की घुघनी का चटक स्वाद हो या समोसे का करारा पन सबकी अपनी अलग पहचान है जो वाराणसी को अनूठा बनाती है। 

यह रचनाकारों की भी नगरी है। यहाँ कबीरए रैदासए जयशंकर प्रसाद ए भारतेंदु हरिश्चंद्र ए प्रेमचन्द इत्यादि प्रसिद्ध रचनाकार हैं। संगीत कला के भी क्षेत्र में उस्ताद बिस्मिल्लाह खांए गिरिजा देवीए सितारा देवीए पंडित रविशंकर  जैसी हस्तियों की कर्म स्थली वाराणसी ही रही है। 

काशी हिन्दू विश्विद्यालयए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठए सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय व केंद्रीय तिब्बतियन विश्विद्यालय बनारस ज्ञान का डंका सम्पूर्ण विश्व में बजाते हैं।

अंततः यह कहा जा सकता है कि वाराणसी एक ऐसा जीवंत शहर है जिसने अपने अंचल में तमाम ऐतिहासिक तथ्यए आर्थिक विशेषतायेंए धार्मिक स्थलोंए व सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए हैं। वाराणसी आना प्रत्येक हिन्दू का अभीष्ट होता है। इसे मोक्ष नगरी भी कहते हैं।



Loading...