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बिशम्बर दास, पहली ब्रिटिश एशियाई प्लस-साइज़ मॉडल कि प्रेरक कहानी

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एक समय था जब किसी मॉडल को इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए खुद को हर पैमाने पर खरा साबित करना पड़ता था। सौभाग्य से, वे दिन काफ़ी हद तक समाप्त हो गए हैं । भला हो, ऐसे अभियानों का जिसने मॉडलिंग के क्षेत्र में सकारात्मकता को बढ़ावा दिया । हालांकि आज जब प्लस साइज़ के मॉडल काफ़ी सामान्य होते जा रहे हैं, लेकिन अभी भी सफ़ेद रंग वाले मॉडल्स की ही ज्यादा डिमांड रहती है। यही बात 34 साल की बिशम्बर दास में थी जो उन्हें ख़ास बनाती है। भारतीय पंजाबी और मलेशियाई माता-पिता की बेटी, दास को उम्मीद है कि उसे जो सफलता मिल रही है, उससे अन्य दक्षिण एशियाई लोगों के लिए मॉडलिंग के दरवाजे खुलेंगे, जो मॉडलिंग की दुनिया में अपना विशेष योगदान देना चाहते हैं। बिशम्बर ने अपनी इस मिश्रित पहचान को अपनाया और एक मॉडल के रूप में अपनी संस्कृति और विरासत को अपने करियर में शामिल किया। लेकिन वह अपनी पहचान केवल अपने रूप से ही नहीं बना रही है; उसके पास वकालत और क्रिमिनोलॉजी की डिग्री भी है और वह बहुत अच्छे ढंग से पाँच भाषा बोल सकती है।

विविधताकोबढ़ावादेनेकालक्ष्य

जब अधिकांश मॉडल कोकेशियान होते हैं तो एक एशियाई इन्फ्लुएंसर बनना आसान नहीं होता है। तो दास प्रथम एशियाई प्लस साइज़ मॉडल होने के दवाब का सामना कैसे करती हैं, और इसके क्या फायदे हैं? उन्होंने अपने एक साक्षात्कार में कहा है कि वह अपने सभी काम से प्यार करती है क्योंकि यह उन्हें सकारात्मकता फैलाने और शारीरिक शर्म का मुकाबला करने की हिम्मत देती है, खासकर वहाँ जहाँ लोग प्लस साइज मॉडलिंग से परिचित नहीं हैं। ऐसी दो चीजें हैं जो उन्हें विशेष रूप से निराश करती हैं। पहली, यह है कि सभी प्रमुख ब्रांड समावेशिता और विविधता का दावा करते हैं, फिर भी केवल एक या दो ब्लैक मॉडल ही हैं जो उनके ब्रांड का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह इस बात का सबूत है की यह बातें केवल कहने के लिए है । दूसरी, यह कि वे कभी भी दक्षिण एशियाई लोगों को अपने अभियानों में शामिल नहीं करते हैं, जो यह दर्शाता है कि अभी बहुत काम करने की आवश्यकता है।

व्यक्तिगतसंघर्ष

उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि अत्यंत कठिन सौंदर्य मानकों को प्राप्त करने के जुनून ने उनके व्यक्तिगत जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। आप रेडियो पर जो गाने सुनते हैं, और यूट्यूब पर जो वीडियो देखते है उनमे स्री के शरीर की बनावट में बड़े नितम्ब और पतली कमर की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है। पूरी दुनिया के विज्ञापनों में नीली आंखों और सुनहरे बालों पर जोर दिया जाता हैं। दास का कहना है कि अत्यंत पतले होने की जरुरत ने उन पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव डाला । स्थिति यह हो गई कि वो खुद को बेकार महसूस कराने लगी थी और आत्महत्या के बारे में भी सोचने लगी थी । उन्होंने हाल तक अपने इन संघर्षों का खुलासा नहीं किया था । वह महसूस करती है कि इन भावनाओं को बताना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें लगता है कि यह सुनिश्चित करना उसकी ज़िम्मेदारी है कि कोई भी चाहे वह युवा हो या बूढ़ा, पुरुष हो या महिला, प्लस साइज़ का हो या और कोई भी हो, यह महसूस न करे कि उसके पास समाज में योगदान करने के लिए कुछ भी नहीं है। उन्हें इस बात से सुकून मिलता है कि समय के साथ एशियाई समुदाय ने उन्हें स्वीकार किया और गले भी लगाया ।

अभूतपूर्वउपलब्धियां

बिशम्बर ने पहले ही कुछ उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर ली हैं। मॉडलिंग के किसी भी अनुभव के बिना, उन्होंने अपने पहले सौंदर्य प्रतियोगिता में उपविजेता बनने में सफल रही । उन्होंने इस प्रतियोगिता में एकमात्र प्लस साइज महिला के रूप में ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व किया था और नौ यूरोपीयन देशों के प्रतियोगियों से प्रतिस्पर्धा की थी । यह दास के लिए जीवन बदलने वाला कभी न भूलने वाला क्षण था। उन्हें अचानक अपने जीवन का उद्देश्य मिल गया जो था, जो उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें ये महसूस होता है कि उनकी आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं है । वे चाहती हैं कि युवा, विशेष रूप से उन लोगों की उपेक्षा करें जो उन्हें बताते हैं कि उन्हें कैसा दिखना चाहिए । इसके बजाय, केवल एक चीज जो मायने रखती है उस पर ध्यान देना चाहिए और वह है कि आप कैसा महसूस करते हैं।

मन, शरीरऔरआत्मापरध्यानदें

बिशम्बर यह बताने की कोशिश नहीं कर रही है कि उसके पास शारीरिक जागरूकता अभियान को ले कर किए गए सभी सवालों के जवाब है , लेकिन फिर भी वह समझती है कि जब अन्य दक्षिण एशियाई देशों के लोग उन्हें देखते हैं, तो उन सभी को ऐसा लगता है कि वे भी मॉडलिंग की दुनिया में और उससे आगे भी सफ़लता पा सकते हैं। जीवन को सही उद्देश्य तभी मिलता है जब हम स्वयं को स्वीकार करना शुरू करते हैं और यह जानने की कोशिश करते है कि हम कौन हैं; और दास जैसे लोगों का होना यह दर्शाता है कि कुछ भी असंभव नहीं है। अंततः जो चीज़ समाज को सुंदर बनाती है, वह है हमारे पास मौजूद सकारात्मक ऊर्जा और दूसरों के साथ हमारे व्यवहार करने का तरीका । यदि आप उनके नक्शे कदम पर चलने का सपना देखते हैं, तो आपको केवल अपने स्वस्थ शरीर पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए , बल्कि आपको ये सुनिश्चित करना चाहिए  कि आप  अपने मन और आत्मा को स्वस्थ रखने पर भी उतना ही समय व्यतीत करें।

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