COVID–19 के इर्दगिर्द 3 अनोखे षड्यंत्रकारी सिद्धान्त

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यहाँ यह बताना समीचीन होगा कि कोरोना वायरस की समस्या तेज़ी से विश्व में फैल रही है, ढेर सारे भ्रामक प्रचार और प्रकोप के बारे में षड्यंत्र सामने आए हैं। आखिर यह विषाणु है क्या – एक गुप्त जैविक अस्त्र, चीन की अर्थव्यवस्था की प्रगति को रोकने के लिए पेंटागन की गलत सोच या शायद यह केवल एक स्वतंत्र विषाणु है।

षडयंत्रो के सिद्धांत नवीन स्टारबक्स मंचो की तरह पॉपिंग कर रहे हैं। परंतु हम विशिष्ट लोंगो को देखने का प्रयास करते हैं।परंतु ध्यातव्य हो कि षडयंत्रो के सिद्धांत को मना नही कर सकते, क्योकि यह सदैव गायब खण्डों के लिए जिम्मेदार होंगे। हालांकि यह उन को पूरी तरह प्रामाणिक नही बनाता है।

जैविक हथियार

महत्वपूर्ण व जिम्मेदार वैज्ञानिक स्थानों में से एक जहाँ वैज्ञानिक अपने कार्यो को प्रकाशित करते है, जनवरी के अंतिम  सप्ताह में एक रोचक लेख सामने आया। भारतीय चिकित्सको के एक वर्ग ने दावा किया कि COVID-19 के आनुवंशिक सरंचना में प्रोटीन के कुछ उपखण्ड मौजूद हैं जो मानव एम्यूनोडिफिशियली विषाणु के खण्डों के समान है।

वैज्ञानिकों ने नए कोरोना वायरस की बनावट में चार खण्ड मिलने की बात कही है, जिनमे कोई एनालॉग नही है। उन भारतीय वैज्ञानिकों के अनुसार इस बात की प्रबल आशंका है कि किसी ने जानबूझकर दो विषाणु को पार किया है। जिसके तुरन्त बाद षड्यंत्र सिद्धांत उदित हुआ कि यह विषाणु वुहान  के वायरोलॉजी संस्थान में निर्मित हुआ था।

हालांकि प्रकाशन के बाद चीन के विद्वानों ने पूरी तरह खंडन किया है। कुछ दिनों बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने अपना कार्यस्थल बदल दिया। तब तक विलम्ब हो चुका था। वाशिंगटन टाइम्स ने इस सूचना को महत्व दिया और प्रसारित किया। उस लेख के अनुसार COVID-19 को वुहान प्रान्त के वुहान संस्थान में एक जैविक अस्त्र के रूप में उच्चीकृत किया गया जो त्रुटिवश मुक्त हो गया था। हालांकि मैं इस बात से सहमत नहीं हूं, परन्तु सरकार की यही मनोदशा है।

कनाडा का निशान

एक्स कागजात में माहिर कई अमेरिकी प्रकाशनों ने इस जानकारी का खुलासा किया है कि 2018 में कनाडाई अनुसंधानकर्ताओं ने वायरस का एक स्ट्रेन का विक्रय किया और बताया कि COVID-19 को कथित तौर पर एक कनाडाई प्रयोगशाला में निर्मित किया गया था। यह वही स्थान है जहाँ वे संक्रामक रोगों को दूर करने के लिए विकसित टीकों और तरीकों पर काम करते हैं।बताया जाता है कि एक चीनी अनुसंधानकर्ता ने कुछ समय तक वहाँ काम किया जिसे बाद में वहाँ से हटा दिया गया।

हालांकि यह अभी भी रहस्य बना हुआ है कि वैक्सीन लैब में विषाणु क्यो निर्मित किया गया और कनाडा ने यह वायरस चीन को क्यों बेचाघ् यहां यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस खतरनाक विषाणु को चीन क्यो क्रय करेगा, क्या यह जैविक हथियार बनाने का प्रयोग था।

अतः यह कहा जा सकता है कि कनाडाई डॉक्टरों ने रिसर्च प्रयोग के लिए कॅरोना वायरस का विकास किया। एक चीनी जासूस ने वैज्ञानिक के वेश भूषा में उन लैब में काम किया, उस विषाणु को चुराया और इसे चीन को बेच दिया। हालांकि यह बात वास्तविकता से परे है।

ईविल फार्मेसिया

इन संदर्भो में एक सोच यह भी है कि पहली नज़र में यह बिल्कुल ही पागलपन या सनकीपन ही है, परन्तु यदि आप विस्तृत रूप में देखें तो पाएंगे कि यू ट्यूब पर कॅरोना विषाणु  के संदर्भ में प्रथम सूचना मिलने के एक हफ्ते बाद ही सर्वत्र वीडियो दिखाई देने लगे थे, इस वायरस का सामना करने के लिए एक बहुत ही विवादों से परिपूर्ण समाधान के प्रयोग का आह्वान किया गया था।यहाँ हम संक्षेप में चमत्कारिक मिनरल अवलेह नामक पदार्थ के बारे में बात कर रहे हैं, असल में कुछ वर्ष पूर्व यह अवलेह ऑटिज़्म नामक रोग के इलाज के रूप में इंटरनेट पर बहुत ज्यादा प्रचारित प्रसारित किया गया था। इस जादुई पानी में अमूमन दो भाग जल है व एक भाग क्लोरीन उपस्थित है – इसे सार्वभौमिक दवा के रूप में प्रचारित किया गया था।

क्योकि इसमें ऐसे तत्व होंते हैं जो किसी भी बीमारी को नष्ट करने में सक्षम होते हैं लेकिन एक स्वस्थ ऊतकों के लिए लाभदायक नही है। कम से कम विज्ञापन तो इसी बात की सूचना देता है।

कुछ साल पहले जब लोंगो ने इस चमत्कारिक जल पर अत्यधिक रूप से विमर्श शुरू की, तो अमेरिकी डॉक्टरों ने इस मुद्दे पर लगभग चुप्पी साध ली थी। डॉक्टरों ने बताया था कि यह जल दवा नही बन सकता, क्योकि विशेष रूप में यह औद्योगिक ब्लीच से अधिक कुछ भी नहीं है।परंतु कोरोना वायरस की समस्या इस तरह के  यूनिवर्सल सुरक्षा तरीकों को अग्रसारित करने के सर्वोत्तम तरीकों में शुमार है। संसार की लाखों माताएं एक भयानक विषाणु की खबर से, मृत्यु से  भयाक्रांत रहती हैं जो कि निःसीम है।

उन माताओ को अपने नॉनिहलो को कुछ भी खिलाने में खुशी होगी यदि यह दवा उन्हें आरोग्य प्रदान करती है। कहने का अर्थ यही है कि आप सभी लोंगो के पास अपना दिमाग है, उचित अनुचित का ध्यान रखें।



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